हे प्रभू ! तेरी रची कुदरति एक हैरान करने वाला तमाशा है। तेरे चरण सराहनीय हैं।
हे सदा कायम रहने वाले पातशाह ! तेरी सिफत-सालाह (एक) अमूल्य (खजाना) है।
हे प्रभू ! तेरा नाम सोहाना है। तेरा नाम मीठा है। तेरा नाम अच्छा है।
दुनिया का मान झूठ है। जल्दी खत्म हो जाने वाला है। दुनिया के माण का क्या भरोसा।
हे प्रभू ! तेरी भक्ति करने वाले बंदे सुंदर हैं। उनका दर्शन बेअंत (अमूल्य) है।
हे प्रभू ! तेरे नाम के बिना (जीव के लिए) सारी दुनिया (का धन-पदार्थ) राख (के तुल्य) है
हे भाई ! दिन-रात उस परमात्मा का नाम सिमरा कर।
वह निआसरों का आसरा है (निओटों की) ओट है।
हे नानक ! जिस मनुष्य पर मालिक-प्रभू स्वयं दयावान होता है।
उसकी जिंद से। उसके दिल से। उसके प्राणों से वह कभी नहीं बिसरता।