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बेदी बाबा  दुखियाँ दे नाथ वे,
रवे सिर पे मेरे तेरा हाथ वे,

मेरी सी कोई नेक कमाई,
मैनु दर तेरे लै आए,
मेरे अपने ते छड़ गये साथ वे,
बेदी बाबा  दुखियाँ दे नाथ  वे,

कागा नैन निकास के पीया पास ले जाये,
कहले दर्श करा के आ चो रीजे खाये,
किरत कर रब की विशडे कर किरपा मैनु राम,
चार कुंनठ देख के सफर में थकाए प्रब की शाम,
बेदी बाबा  दुखियाँ दे नाथ  वे

जह मात पिता सुत मीत न भाई ॥
मन ऊहा नामु तेरै संगि सहाई ॥

अपुने सेवक की आपे राखै आपे नामु जपावै ॥

जह जह काज किरति सेवक की तहा तहा उठि धावै ॥


मेरी सी कोई नेक कमाई,
मैनु दर तेरे लै आए,
मेरे अपने ते छड़ गये साथ वे,
बेदी बाबा दुखियाँ दे नाथ  वे,