हे प्रभू ! हम जीव तेरे (दर के) मंगते हैं।तू स्वतंत्र रह के सब को दातें देने वाला है।
हे प्रभू ! मेरे पर दयावान हो।मुझ मंगते को अपना नाम दे (ता कि) मैं सदा तेरे प्रेम-रंग में रंगा रहूँ। 1।
हे प्रभू ! मैं तेरे सदा कायम रहने वाले नाम से सदके जाता हूँ।
तू सारे जगत का मूल है; तू ही सब जीवों को पैदा करने वाला है कोई और (तेरे जैसा) नहीं है। 1।रहाउ।
हे प्रभू ! मुझ माया-ग्रसित को (अब तक मरने के) अनेकों चक्कर लग चुके हैं।अब तो मेरे पर कुछ मेहर कर।
हे प्रभू ! मेरे पर दया कर।मेरे पर यही कृपा कर कि मुझे अपना दीदार दे। 2।
हे भाई ! नानक कहता है– गुरू की कृपा से जिस मनुष्य के भ्रम के पर्दे खुल जाते हैं।उसकी (परमात्मा के साथ) गहरी सांझ बन जाती है।
उसके हृदय में (परमात्मा के साथ) सदा कायम रहने वाली लगन लग जाती है।गुरू के साथ उसका मन पतीज जाता है। 3। 1। 9।