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हरि नाम के हीरे मोती में बिखरावा गली-गली
लेलो रे कोई राम का प्यारा शोर मचावा गली गली
जिस-जिस ने ये हीरे लूटे वो तो माला माल हुऐ
दुनिया के बने पुजारी आखर वो कंगाल हुरे
धन दौलत व माया वाला"म समझावा गली-गली

धन दौलत और दुनियाँ वाला इकमदन एसा आयेगा
धन दौलत और माल खज़ानां यही पंड़ा रहं जायेगा
सुन्दर काया.माटी होग़ी चर्चा हागा गली "गली

मित्र प्यारे सब सम्बन्धी इक़  दिन' तुझे भूलायी
जिनका, अपना कहत हों तुम.वह अग लगायेगें

जगत मंसाफिर-चार दिनों-को आखर्होगी चला चली
जिनंको अपना कहं कर बन्दंतू इतनां इतराता ह
छोड़ेोंसब बीच में तुरकों कोई साथ नहीं जाता है
दो दिन का पे चमन खला है मुरझायेगी कली कली
झूठे धंधे छोड़ के बन्दे जपले हरि के नाम को


क्यों करता है मेरी-मेरी -छाड़ दे झूठे काम के

जगत मुसाफिर चार  दिनों  का अखिर होगी  चला चली