हे प्यारे भगवान ! जब मैं तुझे एक घड़ी भर भी नहीं मिलता तो मुझे जैसे कलियुग सा प्रतीत होने लगता है
मैं तेरे विछोड़े में विहवल हूँ~ बताओ अब मैं आपको कब मिल सकूँगा। (हे भाई ! गुरू की शरण के बिना परमात्मा से मिलाप नहीं हो सकता~ तभी तो)
गुरू का दर्शन करने के लिए मेरा मन बड़ी तमन्ना कर रहा है
जैसे पपीहा स्वाति बूंद के लिए तड़पता है) पपीहे की तरह (मेरा मन गुरू के दर्शनों के लिए) तड़प रहा है।
प्यारे संत-गुरू के दर्शन के बिना (दशर्नों की मेरी आत्मिक) प्यास तृप्त नहीं होती। मेरे मन को धैर्य नहीं आता।
मैं पिआरे संत-गुरू के दर्शन से कुर्बान हूं~ सदके हूँ।
हे धर्नुधारी प्रभू जी ! तेरा मुख (तेरे मुंह का दर्शन) सुख देने वाला है (ठण्डक देने वाला है) तेरी सिफत सलाह (मेरे अंदर) आत्मिक अडोलता की लहर पैदा करती है।
हे धर्नुधारी ! तेरे दर्शन किए काफी समय हो चुका है।
हे मेरे सज्जन प्रभू ! वह हृदय-देश भाग्यशाली है जिसमें तू (सदा) बसता है।
हे मेरे सज्जन गुरू ! हे मेरे मित्र प्रभू ! मैं तेरे पर कुर्बान हूँ~ सदके हूँ।
गुरू के दरबार का दर्शन करने के बिना मेरी (जिंदगी की) रात (आसान) नहीं गुजरती~ मेरे अंदर शांति नहीं आती।
मैं गुरू के दरबार से सदके हूँ कुर्बान हूँ जो सदैव अटॅल रहने वाला है।
मेरे भाग्य जाग पड़े हैं~ गुरू ने मुझे शांति का स्रोत परमात्मा मिला दिया है
(गुरू की कृपा से उस) अबिनाशी प्रभू को मैंने अपने हृदय में ढूंढ लिया है।
हे दास नानक ! (कह–हे प्रभू ! मेहर कर) मैं तेरे दासों की (नित्य) सेवा करता रहूँ~ (तेरे दासों से) मैं एक पल भर भी ना बिछड़ जाऊँ~ एक रत्ती भर भी ना अलग होऊँ।
हे दास नानक ! (कह– हे प्रभू !) मैं तेरे दासों से सदके हूँ कुर्बान हूँ।