हे भाई ! जिस प्रभू ने चारों तरफ (सारी सृष्टि में) अपनी कला फैलाई हुई है।उसने (अपने दास के) सिर पर सदा ही अपना हाथ रखा हुआ है।
मेहर की निगाह से अपने दास की ओर देखता है।और।उसका हरेक दुख दूर कर देता है। 1।
हे भाई ! परमात्मा अपने सेवक की (हमेशा) रखवाली करता है।
(सेवक को अपने) गले से लगा के दया-का-घर सर्व-व्यापक बख्शनहार प्रभू उनके सारे अवगुण मिटा देता है।रहाउ।
हे भाई ! प्रभू के दास अपने प्रभू से जो कुछ माँगते हैं वह वही कुछ उनको देता है।
हे नानक ! (प्रभू का) सेवक जो कुछ मुँह से बोलता है।वह इस लोक में परलोक में अटल हो जाता है। 2। 14। 45।