वडहंसु महला ५ ॥
हे मेरे स्वामी ! हे सर्व-व्यापक प्रभू ! तू सबसे बड़ा दाता है।
तू (जीवों के) दिलों की जानने वाला है।तू सबके अंदर मौजूद है। 1।
हे मेरे प्रीतम प्रभू ! तेरा नाम (मेरी जिंदगी का) आसरा है।
तेरा नाम सुन सुन के मैं आत्मिक जीवन हासिल करता हूँ। 1।रहाउ।
हे मेरे पूरे सतिगुरू ! मैं तेरी शरण आया हूँ।
तेरे संत-जनों के चरणों की धूड़ से मन पवित्र हो जाता है (और।परमात्मा का दर्शन होता है)। 2।
तेरे सुंदर कोमल चरण मैंने अपने हृदय में टिकाए हुए हैं।
हे प्रभू ! मैं तेरे दर्शनों से कुर्बान जाता हूँ। 3।
हे नानक ! (कह– हे प्रभू !) मेहर कर।मैं तेरे गुण गाता रहूँ।
और तेरा नाम जपते हुए आत्मिक आनंद लेता रहूँ। 4। 5।