मुझे रास आ गया है तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना
"मुझे इसका गम नहीं है
कि बदल गया जमाना
मेरी जिन्दगी के मालिक
कहीं तू बदल न जाना
अच्छा हूँ या बुरा हूँ
आखिर तो हूँ तुम्हारा
मेरे चार पास मेरे पास झोली
खाली तेरे पास है खजाना
मेरी खुशी है. इसमें,
दम निकले तेरे दर पर
मनहर की इन्तजाह है,
इसको न तू ठुकराना