मेरे सर पे हाथ तुमने जब से रखा हुआ है
मुझ गरीब का जहाँ मे, पद ढका हुआ है
"लाज जाने ना दे आय आने ना दे
अशक गौरो के आगे बहाने ना दे
सूखे चावल सूदामा के खाता है जो
चीर आके दोपद का बचाता है जो मेरा दाता है वो..."
1) मुझको हर इक बरला से महफूप्त कर दिया है
खाली था मेरा दामन खुशियों से भर दिया है
"मेरी लाज रख रहा है बाबा बीशन का जामा
इसने ही मुसीबत में आकर मुझे बचाया
मैं लड खड़ा गया था जब दोरे गरदीशों में
दाता ने हाथा थामा चलना मुझे सीखायों"
तेरे करम से मेरा दामन भरा हुआ है मेरे सर...
२) मेरी हर इक जगाह पर रखी है लाज तुमने
मुझको बचा लीया हैं बंदा नवाप्त तुमने
सुनकर पुकार मेरी, हाजीर वही हुआ है मेरे सर...
3) सर को झुका दिया है, जब से तुम्हारे दर पे
किसमत सवर गई है सदके तेरी नजर के
तेरा आसरा ना छूटे, तेरे दिल की ये सदा है.. मेरे...
4) चौखट तुम्हारी दाल मुझे रास आ गई है
मानो खुदा की कुदरत मेरे पास आ गई है
तेरे दर का जब से नारंग सेवक बना हुआ है मेरे...