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"जय सियाराम''

माँवा - माँवा - माँवा माँ जन्नत दा परछावा हो .....,
माएं तेरे वेडे विच्च रब्ब वसदा
ओ.. तैनू छड़ के मैं दूर क्यों जावें.....

माँवा....

बच्चे ते बच्चे ने गलतियों करदे ने ,
पर माँ पे सीने नाल, लाई रख देने ने,
करे मेरा मेरी माँ, मेरी रखवाली माँ,
हो, तेनू लग्न ना तलियोंहवावा.. ,
माँवा....

माँ नु वेख के ठंड कल्ले पेंदी है, पेंदी है,
मां वल तक के थोड़ कोई रैहन्दी ए,
दुखो साढ़े लेहँदी माँ, सुख सान्नू देन्दी माँ,
आओ माँ तेरीयों ठंडाई ने छाँव,
माँवा....

भागा भरया' करमा दा वेला आया ए ,
सबने माँ दी चरणी शीश नवाया ए,
भोली ऐ मेरी माँ भरदी ऐ झोली माँ,
ऐसे माँ तो मैं वारी-वारी जॉग ...
माँवा....


माँ बच्चेमों दे अवगुण  नु ढक लेंदी ऐ,
कहन्दा में नहीं सारी दुनिया कहन्दी ए
बिगड़े सवार दि माँ, डुबाया नूं तार दी माँ ,
में तेरीयां लंबिया ने बावा ,

  माँवा - माँवा - माँवा .....