' जय सिया राम '
न भाग्य की रेखा है, मेरे इन हाथों में ,
न कुंजी कर्मों की, जीवन के खातों में,
न करण नवाजी है, मुझपर मेरे दाता की ,
मेरे काम हो रहे हैं , बातो ही बातों में,
मैं जिक्र करु इनका इन्हें रहती फिकर मेरी,
ओ इनके सिर चलते ही, हुई चिंता दूर मेरी,
ओ इन्हें ध्यान मेरा, दिन में और रातों में,
ओ मो काम हो रहे हैं.....
ओ मेरा बाता पारस है, इसमें सच्चाई है,
मुझ जैसे लोहे की, किस्मत चमकाई है,
करामात निराली हैं, इनकी करामाती में,
ओ मेरे काम हो रहे हैं.....
में इनके भरोसे पर, आराम से सोता हूँ,
परेशानी में भी में, परेशान न होता हूँ,
आंनद में रहता हूँ, हर एक हालातों में,
ओ मेरे काम हो रहे है.....
ओ सब पूछते नारंग से, तूने की क्या कमाई है,
जो पीर नौशैरे की, तुझे मिली गदाही हैं,
मैं कहता बाँधा है , इन प्रेम के धागों में
ओ मेरे काम हो रहे हैं.....' जय सिया राम '
ओ मेरे काम हो रहे हैं.....