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जय सिया राम

दोहा :

भक्ति भाव उर धार के, करता है जो जाप।
माता जी की कृपा से, दूर होवे सन्ताप ।।



।। जय सिया राम ।।

चौपाई

1. जय जय माँ शकुन्तला रानी।
आदि शक्ति जग बारहुं बखानी ।।

2.कष्ट निवारिणी जय जग माता।
सर्व सिद्धि नव निधि की दाता ।।

3. महाराज दलीप प्राणेश तुम्हारे।
तीन लोक के जो रखवारे ।।

4. तुम समान नहीं कोई उपकारी।
शीतल मृदुल है वाणी तुम्हारी ।।

5. रिद्धि सिद्धि कहलावहं माता।
महिमा अमित जग विख्याता ।।

6. पालन पोषण तुम्हीं करातीं।
सुख सम्पत्ति सौ झोली भरातीं।।

7. नाम जपे मंगल सब होई।
संशय इसमें करेन कोई ।।

8.सकल जीव तोहि परम प्यारा।
सकल विश्व तोरे आधारा ।।

9. निश्चय मात शरण जो आवे।
निर्भय मन इच्छित फल पावे ।।

10. अणु अणु में ज्योति तुम्हारी।
तीनों लोक फैली उजियारी ।।

11. परम पुनीत जगत आधारा।
मात शकुन्तला प्रेम तुम्हारा ।।

12. नमो नमो जय जय सुखकारनि।
नमो नमो जय दुख निवारनि ।।

13. जो जन पाठ करे मन लाई।
मात शकुन्तला सदा सहाई ।।

14. नाम जपत बाधा सब भागे।
रोग दोष फिर कबहूँ न लागे ।।

15. हर विपदा में होत सहाई।
माँ जगत में करे भलाई ।।

16. मधुर मधुर मुस्कान तिहारी।
चरण कमल पे जाऊँ बलिहारी ।।


17. भारी संकट जब जबेआय।
उनसे तुमने भक्त बचाये ।।

18. किरपा तुम्हारी पा के माता।
जीवन सुखमय है बन जाता ।।

19. आनंद, सुख सम्पत्ती देतीं।
कष्ट भयानक को हर लेतीं।।

20. सबको पार लगाती हो माँ।
सब पर दया दिखाती हो माँ ।।

21. मधुर भाषिणी जय जग माता।
मात शकुन्तला सर्व सुख दाता ।।

22. जो सेवक धरै मात कर ध्याना।
ताकर सदा होवे कल्याना ।।

23. तुम समान नहीं कोई उपकारी।
पूरण करहु माँ आस हमारी ।।

24. किस विधि स्तुति करूँ तिहारी।
सुध लीजै मम दोष बिसारी ।।


25. कर विश्वास जपै जो नामा।
होय सिद्धि उपजै उर प्रेमा ।।

26. जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे।
नाशै दुख सब रोग निस्तारे ।।

27. अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता।
सर्व समर्थ शकुन्तला माता ।।

28. जय जय माँ भव पार उत्तारनि।
जयति जय माँ सुख उपजावनि ।।

29. दास जान निज दया दिखावहूं।
सब परिवार सहित अपनावहु ।।

30. करूं विनय मैं मात तुम्हारी।
पूरण आशा करहूं हमारी ।।

31. आनन्द कारिणी आनन्द निधाना।
घरे ध्यान, होवै कल्याना ।।

32. आया माँ जो शरण तुम्हारी।
विपदा हरी उसी की सारी ।।


33. सेवक को माँ पार लगाती।
सब पर माँ दया है दिखाती ।।

34. जयति जय माँ सन्तन हितकारी।
मंगल करण अमंगलहारी ।।

35. तुम्हरे सिवा न कोई मेरा।
मुझे एक बस आश्रय तेरा ।।

36. मनोकामना पूरन करतीं।
सर्व दुख माँ नित ही हरतीं।।

37. ना जानूँ मैं अर्चन पूजा।
और सहारा नहीं मम दूजा ।।

38. मैं सेवक हूँ दास तुम्हारा।
जननी करना भव निस्तारा ।।

39. भूल चूक कर क्षमा हमारी।
दर्शन दीजे दशा निहारी ।।

40. चरण कमल पे जाऊँ बलिहारी।
जय जय जय जग जननी तुम्हारी ।




दोहाः

शांत भाव आनन्दमय, माँ की महिमा अपार।
चरण कमल जेहि उर बसै, तां का बेड़ा पार ।।