तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ
न कुछ और इसके सिवा चाहता हूँ
तेरी मूरती अपने दिले में बसाकर
मुहब्बत का इक, छोटा मन्दिर बना कर
तेरे चरन कमलों में आखें बिछाकर
तुम्हे रात दिन पूजना चाहता हूँ
कई मुशलके भी अगर पेश आये
बला से जो आये हजारों बलाये
न मेरे कदम राह में डगमगाऐ
तेरे कदमों तक पहुँचना चाहता हूँ
जमाने से मुझ को है क्या लेना देना
बनेतो बने तुम से वरना बने ना सिवा
तेरे ओरो से मतलब रहे ना कि
मैं दास तेरा बना चाहता हूँ