बिलावलु महला ५
ताती वाउ न लगई पारब्रहम सरणाई ॥
हे भाई ! परमात्मा की शरण पड़ने से (
व्याधियों का) सेक नहीं लगता।
चउगिरद हमारै राम कार दुखु लगै न भाई ॥१॥
हे भाई ! हम जीवों के चारों तरफ परमात्मा का नाम (मानो) एक लकीर है (जिसकी बरकति से) कोई दुख छू नहीं सकता। 1।
सतिगुरु पूरा भेटिआ जिनि बणत बणाई ॥
हे भाई ! जिस गुरू ने (परमात्मा का नाम-दवा दे के जीवों के रोग दूर करने की) बिउंत बना रखी है।
राम नामु अउखधु दीआ एका लिव लाई ॥१॥ रहाउ ॥
वह पूरा गुरू (जिस मनुष्य को) मिल जाता है और परमात्मा का नाम दवाई देता है। वह मनुष्य सदा परमात्मा में सुरति जोड़े रखता है। 1। रहाउ।
राखि लीए तिनि रखनहारि सभ बिआधि मिटाई ॥
हे नानक ! कह- (जिस मनुष्य को गुरू मिल गया उसको) उस रखवाले प्रभू ने बचा लिया। (उसके अंदर से) हरेक रोग दूर कर दिया।
कहु नानक किरपा भई प्रभ भए सहाई ॥२॥१५॥७९॥
उस मनुष्य पर प्रभू की कृपा हो गई। प्रभू उस मनुष्य का मददगार बन गया। 2। 15। 79।