हे भाई ! परमात्मा की शरण पड़ने से (व्याधियों का) सेक नहीं लगता।
हे भाई ! हम जीवों के चारों तरफ परमात्मा का नाम (मानो) एक लकीर है (जिसकी बरकति से) कोई दुख छू नहीं सकता।
हे भाई ! जिस गुरू ने (परमात्मा का नाम-दवा दे के जीवों के रोग दूर करने की) बिउंत बना रखी है।
वह पूरा गुरू (जिस मनुष्य को) मिल जाता है और परमात्मा का नाम दवाई देता है। वह मनुष्य सदा परमात्मा में सुरति जोड़े रखता है।
मिल गया उसको) उस रखवाले प्रभू ने बचा लिया। (उसके अंदर से) हरेक रोग दूर कर दिया।
उस मनुष्य पर प्रभू की कृपा हो गई। प्रभू उस मनुष्य का मददगार बन गया।