दरबार तेरा दाता हम सबका सहारा है।
हम जैसे गरीबों का तेरे दर से गुज़ारा है
नज़रों से गिराना न, दर से ठुकराना न,
इक तेरे सिवा दाता कोई न हमारा है।
हमे तुम्से मुहोबत है, ये बात हकीकत है,
दिवाना तेरा हमको कहता जग सारा है।
तेरे ये तेरे है, तेरे ही रहेगे हम,
किसी गैर के कहलाएँ,
ये न हमको गंवारा है।
जिसने भी नाव अपनी,
की तेरे हवाले है
उस करती को तुफां में,
मिल जाता किनारा है।
नारंग कर की कीर हस्ती क्या,
पे जो आ जाए,
तुम खुद ही बुलाते हो,
ये करम तुम्हारा है।