ऊँची निगाह वाले तुझको सलाम मेरा.
सुनते है हुस्न या रब, जलवा है आम तेरा
कुदरत है तुझसे पैदा, तुमसे जहां है पैदा
तू है तमाम आलम, आलम तमाम तेरा
ऊँची.....
रहमत के है इशारे, हर राह में दे नजारे,
धरती मैं मिला गया है, हमको मुकाम तेरा
ऊँची.....
रहते हो जिस के दिल पे पूरे जहूर बनकर
चमके वो आसमा पर पी पी के जाम तेरा
ऊँची.....
नक्शे कदम पे तेरें रख दी जमी जिसने
सुलतान दो गया वो, अदना गुलाम तेरा
ऊँची.....
जो भी खता है मेरी तेरी नजर मे दाता
क्यों कर न बक्श देगा , रहमत है नाम तेरा
ऊँची.....
तेरी कृपा से दाता, चलता है, काम मेरा
करता तो तू दाता होता है नाम मेरा
ऊँची.....