Laravel

वांहो वांहो दिलीप सिंह जी 

 

 

वाहो - वाहो दिलीप सिंहजी, घट. घर वासी दिलीप सिंहजी,

 

सेक लगे जद सेवक ताही, तुरत सुने फरियावा, 

बकसे करदा पीर मुहम्मद, पवन मुरीद मुरादा, 

वाहो -

 

पीर मेरा है कमलीवाला, पीरा शाह  कलंदर 

हर मुश्किल नु हल कारिन्दा, दोनों जहां दे अंदर,

 

 

ओतरेया तू पुत्तर देन्दा विच्छेडे यार मिलावे, 

दर उसदे दी खाक मलन दे, कोट फिरंग उड़ ‌जावे, 

-वाहो

 

 

देणा- देणा हर कोई आखे, बडा है मुशकिल देणा, 

दाता मेरा सबनू  देन्दा , कदे. न मारे मेणा

वाहो

 

 

मंगे बाजो दे  मुरादा ,  बेअंदाज शुंमारा, 

दाता मेनू सबकुछ दित्ता, दम- दम शुकर गुजारा,,

 

डोल रही सी नैया मेरी, उत्तो रात अंधेरी,

 दाताजी ने कृपा करके, बाँह पड़‌लाई मेरी, 

 

.

 

 कखा जिन्ही कदर न मेरी,  दाते नु वाडियाईया 

मैं गलियों दा रूड़ा कुड़ा महल चढायो सड़ियों